एक तरफ आतंक का जहर, दूसरी तरफ अपनों का कत्लेआम… दो कश्मीर और पाकिस्तान की दोगली नीति – pakistan double standard exposed on Jammu Kashmir pok civilian protesters ntc ksrj

[ad_1]

कश्मीर का नाम आते ही दुनिया के नक्शे पर दो तस्वीरें उभरती हैं- एक तरफ भारत का जम्मू-कश्मीर, जो विकास और शांति की ओर कदम बढ़ा रहा है लेकिन लगातार सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद का दंश झेल रहा है. दूसरी तरफ पाकिस्तान के  कब्जे वाला पाक अधिकृत कश्मीर (PoK), जहां की अवाम बुनियादी अधिकारों के लिए अपनी ही फौज की गोलियों का शिकार हो रही है.

इन दोनों ही तस्वीरों में एक समानता है और वो है कि इनका गुनहगार पाकिस्तान ही है. पाकिस्तान की दोगली नीति और नापाक इरादों के कारण आज ‘दोनों कश्मीर’ का आम नागरिक खून-खराबे और तबाही से बेहद परेशान है.

पाकिस्तान की निर्लज्जता का आलम यह है कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर घूम-घूमकर जम्मू-कश्मीर में कथित मानवाधिकारों की फर्जी दुहाई देता है. लेकिन दूसरी तरफ, अपने अवैध कब्जे वाले PoK में मानवाधिकारों का ऐसा दमन कर रहा है जिसे देखकर इंसानियत शर्मसार हो जाए.

PoK में बर्बरता की हदें पार
बीते कई दिनों से PoK में सरकार और फौज के खिलाफ लोगों सड़कों पर उतरकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं जिसका खामियाजा उन्हें अपनी जान देकर चुकाना पड़ा है.  शुरुआती आंकड़ों में 40 से अधिक लोगों के मारे जाने की खबर थी, लेकिन स्थानीय रिपोर्ट्स और मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का दावा है कि विरोध प्रदर्शन शुरू होने से लेकर अब तक मौतों का आंकड़ा 125 के पार पहुंच चुका है. सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हैं.

यह भी पढ़ें: आसिम मुनीर बने ‘जनरल डायर’! शोक सभा में जुटे पीओके के लोगों पर PAK सेना ने की गोलीबारी, 27 मौतें

बर्बरता का आलम यह है कि जब रावलकोट, मीरपुर और कोटली जैसे इलाकों में बुनियादी हक मांग रहीं महिलाओं के शांतिपूर्ण जुलूस पर भी पुलिस ने गोलियां चलाईं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि कैसे कोटली में शांतिपूर्ण रैली के दौरान गोलियों की आवाज सुनते ही महिलाएं अपनी जान बचाने के लिए भागने पर मजबूर हुईं. इतना ही नहीं, POK प्रशासन ने पूरे इलाके में इंटरनेट और संचार सेवाएं ठप कर दी हैं ताकि उनकी यह दरिंदगी दुनिया के सामने न आ सके.

पाकिस्तान की इस दरिंदगी पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय (OHCHR) के प्रवक्ता जेरेमी लॉरेंस ने गंभीर चिंता जताई है. उन्होंने कहा कि PoK में नागरिक संगठनों को अपराधी ठहराना और सभाओं पर कड़े प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति की आजादी और शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकारों का सीधा उल्लंघन है.

पीओके में लगातार बढ़ रहे हैं प्रदर्शन

 दूसरी तरफ, पाकिस्तानी हुकूमत के इस अत्याचार के आगे PoK के लोग झुकने को तैयार नहीं हैं. जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के कोर कमेटी सदस्य सरदार उमर नजीर कश्मीरी ने ऐलान किया है कि डी-चौक पर धरना जारी है और ‘मुजफ्फराबाद मार्च’ को दोबारा शुरू कर दिया गया है.

यह भी पढ़ें: तालिबान से लड़ाई, बलूचिस्तान-पीओके में विद्रोह…क्या आजादी के बाद से सबसे नाजुक मोड़ पर है PAK?

उन्होंने कहा, “हमारे लोगों को सिर्फ इसलिए गोलियों से भूना गया क्योंकि वे अपने हक मांग रहे थे. हमने अपनों के जनाजे उठाने और घायलों के इलाज के लिए आंदोलन को अस्थाई रूप से रोका था, लेकिन अब उत्पीड़न के खिलाफ मुजफ्फराबाद मार्च फिर शुरू हो गया है. दुनिया भर में मौजूद कश्मीरी, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे इस तानाशाही के खिलाफ सड़कों पर उतरें.”

सच यही है कि पाकिस्तान की इस नफरती और दोगली नीति का खामियाजा सिर्फ और सिर्फ बेकसूर आम जनता भुगत रही है. भारत में उसके द्वारा भेजे गए आतंकवाद से पीड़ित परिवार अपनों को खोने का दर्द झेल रहे हैं, तो वहीं PoK में पाकिस्तानी फौज की बंदूकों के साये में जी रहे लोग भूख, लाचारी और गोलियों का सामना कर रहे हैं. 

—- समाप्त —-

[ad_2]

Source link

Leave a Comment