2 हजार रुपये से ज्यादा की UPI पेमेंट पर जल्द लग सकता है चार्ज, बदलाव की तैयारी में सरकार – UPI payments above 2000 rupees fee charge under proposed law change NTC vhrw

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भारत का मुफ्त UPI पेमेंट सिस्टम को झटका लग सकता है. सरकार ने संसद में ‘पेमेंट एंड सेटलमेंट सिस्टम्स एक्ट’ में बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिससे भविष्य में कुछ खास UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट चार्ज (व्यापारी शुल्क) लग सकता है. हालांकि अभी किसी फीस को मंजूरी नहीं मिली है, लेकिन प्रस्तावित कानूनी बदलाव ने ‘मर्चेंट डिस्काउंट रेट’ (MDR) लागू करने का रास्ता खोल दिया है. पेमेंट इंडस्ट्री लंबे समय से डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए इसकी मांग कर रही है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा पेश किए गए इस बदलाव से तुरंत कोई चार्ज नहीं लगेगा. इसके बजाय, यह एक कानूनी ढांचा तैयार करता है जिससे सरकार बाद में MDR लागू करने का फ़ैसला कर सकती है.

रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, अधिकारी अभी भी इस बात पर चर्चा कर रहे हैं कि फीस कैसे लागू की जा सकती है और रेट या किन ट्रांजैक्शन पर यह लागू होगा, इस पर कोई अंतिम फ़ैसला नहीं लिया गया है.

सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ वालों पर लगेगा चार्ज?

विचार किए जा रहे प्रस्तावों में से एक यह है कि 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI ट्रांजैक्शन पर 0.3% से 0.5% का MDR लगाया जाए. हालांकि, उम्मीद है कि यह चार्ज सिर्फ उन व्यापारियों पर लागू होगा जिनका सालाना टर्नओवर 1.5 करोड़ रुपये से ज्यादा है.

इसका मतलब है कि ग्राहकों को शायद ही कुछ अतिरिक्त भुगतान करना पड़े, जबकि छोटे कारोबारियों को मुफ्त UPI ट्रांज़ैक्शन की सुविधा मिलती रह सकती है.

इस बात पर विचार हो रहा है कि अलग-अलग ट्रांजैक्शन की वैल्यू के बजाय व्यापारी के सालाना टर्नओवर के आधार पर फीस तय करना. पॉलिसी बनाने वाले अलग-अलग तरीकों पर विचार कर रहे हैं ताकि यह पक्का किया जा सके कि अगर MDR लागू होता है, तो इसका बोझ मुख्य रूप से बड़े कारोबारियों पर पड़े, न कि आस-पास की दुकानों और छोटे रिटेलर्स पर.

MDR फीस क्या होती है

MDR वह फीस है जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट प्रोसेस करने के लिए बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स को देते हैं. UPI के उलट, व्यापारी कार्ड पेमेंट पर पहले से ही प्रोसेसिंग चार्ज देते हैं. कारोबार आमतौर पर क्रेडिट कार्ड ट्रांज़ैक्शन पर लगभग 1.5% का भुगतान करते हैं, जबकि डेबिट कार्ड पेमेंट पर बैंक और पेमेंट नेटवर्क के आधार पर कम फ़ीस लग सकती है. UPI को ऐसे चार्ज से छूट मिली हुई है, जिससे यह व्यापारियों और ग्राहकों दोनों के लिए पेमेंट का एक आकर्षक विकल्प बन गया है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि इंडस्ट्री के अधिकारियों ने बार-बार कहा है कि बिना किसी मर्चेंट फीस के UPI सर्विस देने से एक टिकाऊ बिजनेस मॉडल बनाना मुश्किल हो गया है. चूंकि वे UPI ट्रांजैक्शन प्रोसेस करके कमाई नहीं करते हैं, इसलिए इंडस्ट्री के लोगों का मानना है कि नई टेक्नोलॉजी में निवेश करने, पेमेंट इंफ्रास्ट्रक्चर को मज़बूत करने और सर्विस का विस्तार करने की उनकी क्षमता सीमित है.

उनका तर्क है कि ज्यादा वैल्यू वाले ट्रांजैक्शन पर सीमित MDR लगाने से भारत के डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम के लंबे समय के विकास में मदद मिल सकती है.

हालांकि 2,000 रुपये से ज्यादा के ट्रांजैक्शन कुल मर्चेंट UPI पेमेंट का एक छोटा हिस्सा ही होते हैं, लेकिन कुल ट्रांजैक्शन वैल्यू में इनका बड़ा योगदान होता है.

Jefferies के एक एनालिसिस के मुताबिक, मर्चेंट UPI के जरिए प्रोसेस की गई कुल वैल्यू में इन पेमेंट का हिस्सा लगभग 67 प्रतिशत है, जबकि ट्रांजैक्शन की संख्या के हिसाब से ये सिर्फ 4 प्रतिशत हैं. ब्रोकरेज का मानना है कि इस सेगमेंट पर MDR लगाने से डिजिटल पेमेंट इंडस्ट्री के लिए सालाना 5,000 करोड़ रुपये से 10,000 करोड़ रुपये की कमाई का मौका बन सकता है, जिससे Paytm और Pine Labs जैसी कंपनियों को फायदा होगा.

फिलहाल, यह प्रस्ताव सिर्फ एक कानूनी प्रावधान के तौर पर है. सरकार ने अभी यह घोषणा नहीं की है कि MDR लागू किया जाएगा या नहीं, इसकी अंतिम दर क्या होगी, या ऐसा कोई बदलाव कब से लागू होगा. जब तक कोई अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक मौजूदा सिस्टम के तहत UPI पेमेंट मुफ्त बने रहेंगे.

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